Pisaach Ka Saaya

दोस्तों आज मैं आपको bhoot pret ki kahani hindi में बताने जा रही हु, उम्मीद करती हु की ये कहानी आपको बेहद पसंद आएगी ।।। मेरा नाम शिल्पा है। मै एक स्कूल में पढ़ाती हूँ। वैसे तो में एक राजस्थानी हूँ पर बचपन से ही परिवार के साथ मुम्बई मे रहती हूँ। कॉलेज खत्म होते हि मुझे नौकरी मिल गई। पापा और माँ मेरे लिए लड़का ढूंढ रहे थे और में भी अच्छा रिश्ता आने पर हाँ कह देने वाली थी। तभी उन दिनों एक लड़के की नज़र मुझ पर पड़ी, शायद उसे मै अच्छी लगने लगी थी, रोज़ सुबह शाम वह मेरे ऑफिस के बाहर मंडराने लगा, एक दिन मुझे गुस्सा आ गया तो जा कर मैंने उससे पूछा की ये क्या तमासा बना रखा है। मेरे गुस्सा देख कर वह पूरी तरह से डर गया और माफ़ी माँगने लगा और मै तुम्हारे आस-पास नहीं दिखूँगा ऐसा बोल कर मिन्नते करने लगा। मैंने भी उसे जाने दिया। एक हफ्ते तक तो वह दिखा नहीं पर, फिर अचानक वह नज़र आने लगा। लेकिन अब वह काफी दूर खड़ा रह कर मुझे देखता रहता, और मै उसकी और देखू तो वह तुरंत नज़रें फेर लेता। मुझे लगा की शायद वह काफी सीधा लड़का था और दिखने मे भी अच्छा था। तो मैंने फैसला किया की अब उससे बात करूँ क्यूंकि मुझे नहीं लगता था की वह लड़का मुझसे बात करने की हिम्मत कर पाएगा।

मुझे मालूम था की सामने से गयी तो वह डर कर भाग जाएगा, इसलिए मै चुपके से उसके पीछे जा कर खड़ी हो गई, और उसके कन्धे को छुआ, मुझे इतने करीब देख कर उसकी हवा टाइट हो गयी, वह तुरन्त बाइक स्टार्ट कर के भागने की कौशीस करने लगा। तो मैंने तुरन्त बाइक की चाबी निकाल ली और उसे कहा की इरादा क्या है? इस बार भी उसकी हालत पतली हो गई घबराए हुए धीरे से मुझसे बोला की “आई लव यू”, सच कहूँ तो मेरी हसी छूट गयी, लड़का अच्छा था पर मुझे समज़ नहीं आ रहा था की वह इतना ज़्यादा काँप क्यूँ रहा है। मैंने उसका हाथ पकड़ कर उसे कहा की, गभराओ मत मै तुम्हें खा नहीं जाऊँगी। मुझे पता है की तुम मुझे पसंद करते हो इसी लिए मेरे आस-पास चक्कर काट रहे हो। इस प्रकार की हरकतें करने से कुछ हासिल नहीं होगा। मै पसंद हूँ तो मेरे घर अपने पापा और माँ को रिश्ता ले कर भेज देना। अगर सब सही रहा तो मै भी हाँ कर दूँगी। इतना बोल कर मै वहाँ से घर की और चली गयी। शाम के करीब पाँच बजे थे तभी अचानक मेरे घर की बैल बजी, मुझे यकीन नहीं हुआ, वह लड़का उसी दिन अपने पापा और माँ को ले कर मेरे घर आ जाएगा। मैने तुरन्त नए कपड़े पहने, माँ नें चाय नाश्ता तैयार किया और हमारी बात-चित शुरू हो गयी।

उस लड़के की माँ नें कहा की घर का पूरा काम काम वाली बाई करती है, खाना पकाने के लिए अलग से एक कुक है, हम मोर्डेन फैमिली से है, और आप की बेटी अपना काम और पढ़ाई शादी के बाद भी जारी रख सकती है, शादी में हमें सिर्फ आप की बेटी चाहिए बाकी भगवान का दिया सब कुछ है, हमारे बेटा कुछ बुरी आदते नहीं है, स्वभाव से शांत है कमाता अच्छा है, अगर आपको मेरे बेटे से भी कुछ पूछना हो तो आप भी पूछ सकते है। मेरे पापा और माँ तो बहुत खुश थे, उन्होने मेरी और देखा, मैंने उन्हे तुरन्त हाँ कहने का इशारा दे दिया। उसी वक्त मेरी शादी पक्की हो गयी, और करीब सात महीने बाद मेरी शादी भी हो गयी। सुहागरात की सैज पर मै घूँगट ताने बैठ थी, तभी दरवाज़ा खुला और मेरा पति अंदर आया। मै शरम से लाल हो चुकी थी। तभी अचानक मेरे पति नें पीछे से मेरे बांधे हुए बाल घूँघट समेत खींचे और घसीट कर मुझे ज़मीन पर पटक दिया, मै दर्द से कराह उठी और मैं बहुत डर गयी मैंने उनसे कहा की ऐसा क्यूँ कर रहे हो? उसने मेरी बात का एक जवाब नहीं दिया और मुझे गले से पकड़ कर वापिस बेड पर पटक दिया, और फिर वह मुझे जानवरों की नोंचने काटने लगा, मैंने उसे धक्का दे कर अपने से दूर किया, और बेड के कोने पर बैठ कर मै रोने लगी।

आप पढ़ रहे हैं bhoot pret ki kahani hindi में...

वह अब भी मेरी और अजीब नज़रों से देख रहे था, और गुर्राते हुए देख कर बार बार अपनी जींव लब-लबा रहे थे, जैसे की मै उनके लिए इन्सान नही कोई खाने की वस्तु हूँ। मै खौफ में तो थी पर फिर भी, हिम्मत कर के मैंने उन्हें समझाने का प्रयास किया, और रोते-रोते उसे कहा की यह तुम्हारा प्यार है? क्या इसीलिए दिन-रात मेरे पीछे पड़े थे? जब मै बोल रही थी तो उसकी नज़र मेरी गरदन पर थी, कुछ ही देर में उसने फिर से मुझ पर हमला कर दिया और, मेरी गरदन के पास अपनें दाँत गढ़ा दिये। मुझे इतना तेज़ दर्द हुआ की, मेरी बहुत तेज की चीख निकल गयी, कुछ ही देर में घर के सब लोग दरवाज़ा तोड़ कर हमारे कमरे में आ गए फ़िर मै तुरन्त दौड़ कर उन सब के पास चले गयी। मेरी हालत देख कर सब नें मेरे पति को खूब डांटा। देखते ही देखते मेरा पति ज़मीन पर धड़ाम से गिर पड़ा। उसी रात मैंने अपने पापा और माँ को वहाँ बुलाया और शादी की पहेली ही रात मै अपनें घर वापस आ गयी। मेरे ससुराल वालों नें मेरे पति पर पिशाच का साया पड़ जाने का हवाला दिया। और उन्होने कहा की इसके पहले उसने कभी भी ऐसी हरकत किसी के साथ नहीं की थी। यह सब पहली बार हुआ था। सच जो भी हो, मेरे लिए शादी एक खौफ बन चुकी थी। मेरे पापा और माँ नें उन सब से हाथ जोड़ कर कहा की, हम पुलिस में नहीं जाना चाहते आप इज्ज़त से इन दोनों का तलाक करवा दीजिये।

ना चाहते हुए भी उन्हे हमारी बात माननी ही पड़ी, मुझे पता नहीं है की मेरे पति पर पिशाच का साया है या उन्हे कोई दिमागी बीमारी, उन्हे यह तकलीफ उसी रात हुई थी या उसके पहले भी वह ऐसा ख़तरनाक बर्ताव कर चुके थे। उन लोगों की सच्चाई वह लोग जाने और भगवान जाने, लेकिन उस भयानक हमले के बाद, मै चाह कर भी उस इन्सान के साथ रह नहीं सकती थी। चूँकि पूरी जिंदगी डर के साये में बिताने से अच्छा है की रास्ते अलग कर लिए जाए। अब शादी के बंधन में दुबारा बंधने को जी नहीं करता है, क्या पता शरीफ और सीधा दिखने वाला जीवन साथी अंदर से कुछ और निकल जाए।

तो दोस्तों ये थी bhoot pret ki kahani hindi में, आप हमें कमेंट बॉक्स में अवश्य बताएं की कैसी लगी आपको ये कहानी। हम आपके लिए ऐसी ही कहानियां ( Ajanme Shishu ka pret, Rapunzal ki kahani ) हमेशा लाते रहेंगे।

Sharing is caring!

Close Menu
error: Content is protected !!