Murdakhor Chudail ki Kahani

दोस्तों आज मैं आपको मुर्दाखोर chudail ki kahani में बताने जा रही हु, उम्मीद करती हु की ये कहानी आपको बेहद पसंद आएगी ।।। मेरा नाम रवि है। मैंने लगभग हर तरह की नौकरी आजमाई है। दसवी कक्षा की अंतिम परीक्षा के कारण स्कूल से मेरा नाता हमेशा के लिए तौड दिया था। इस समय मै पच्चीस का हो गया हूँ। अब तो पिताजी भी गुस्से मै बोलते रहते हैं की बेटा तू शायद जिंदगी भर मेरे टुकड़ों पर ही पलेगा। मुर्दाखोर चुड़ैल से जब मेरा सामना हुआ तो मै लगभग अपनी जान गवा ही चुका था। पिछले महीने के एक दिन की बात है जब, हमेशा की तरह पिताजी मुजे काम ना मिलने के कारण जली-कटी सुना रहे थे, तब गुस्से में आ कर मेंने भी उन्हे बोल दिया की आज शाम तक अगर मै नौकरी नहीं ढूंढ पाया तो रात को घर वापिस नहीं आऊँगा। ऐसा बोल कर मै काम ढूँढने की खोज में लग गया। रात के बारह बजे तक भटका, पर कोई काम ना मिला। अंत में निराश हो कर एक वीरान कब्रिस्तान के पास पैड के नीचे बैंच पर सो गया। क्यूँकी घर तो काम ढूंढ कर ही जाना था। अभी मेरी आँख लगी ही थी की कब्रिस्तान में से फावड़े और कुल्हाड़ी ज़मीन पर फटकने की आवाज़ आने लगी। मै जाग गया तो देखा की काले कपड़े वाली कोई जवान गोरी औरत कबर खौद रही है। मेरे तो हौश उड़ गए। मै छुप कर देखने लगा। तो थोड़ी देर में उसने कब्र से मुर्दा बाहर निकाल लिया। और भूखे जंगली जानवरों की तरह उस मुर्दे को काँट नौच कर खाने लगी। वह एक दिल दहला देने वाला नज़ारा था।

उस भयानक मंज़र को देख कर मै डर गया। और धड़कने बेहद तेज़ हो गयी थीं। करीब आधे घंटे तक उसने वह मुर्दा खाया और वह उसे फिर से कब्र में गाड़ने लगी। तभी अचानक एक दुर्घटना हुई जिसके कारण उस वक्त मेरी जिंदगी जहनुम बन गयी थी आप सौच भी नहीं सकते की किसी की किस्मत इतनी खराब कैसे हो सकती है, वह मुर्दा खा कर जाने ही वाली थी की मेरे मोबाइल की रिंग बज उठी और उस काले कपड़ों वाली मुर्दाखोर भयानक औरत ने मेरी और पलटी मारी। वह इधर-उधर जांकने लगी। मैं दीवार के पीछे जड़ियों में छुपा था। मुजे लगा वह मुजे नहीं देख पाएगी पर वह मेरी सब से बड़ी भूल थी। पलक जपकते ही वह भयानक औरत वहाँ से गायब हो गयी और मेरे पीछे आकर खड़ी हो गयी। दिखने में वह किसी परी से कम नहीं थी पर उसके मुह पर मुर्दे का गोस और खून लगा था। जिसे देख कर अच्छे-अच्छों की बोलती बंद हो सकती है। उसे अपने सामने देखकर मै बर्फ की तरह जम गया, उसने एक हाथ से मेरा गिरिवान पकड़ा और दूसरे हाथ से मेरा हाथ पकड़ लिया, फिर उसने मुझे ऐसे गले लगा लिया जैसे की वह मेरी हो। करीब पाँच मिनट तक उसने मुझे वहीं गले लगाए खड़े रखा और फिर वह मुझे कब्रिस्तान के अंदर ले जाने लगी। मै हौश में था, पर पता नहीं क्यूँ उसका विरोध नहीं कर पा रहा था। बस उसके साथ चले जा रहा था। एक कब्र के पास आ कर वह भयानक औरत रुक गयी और उस कब्र को खोदने लगीं। कब्र में से आधा खाया हुआ मुर्दा उसने बाहर निकाला और उसे उछाल कर जाड़ियों में फेंक दिया।

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फिर उसने मेरी और देखा, मै पूरा माजरा समज गया की यह अब मुझे उस कब्र के अंदर डालने वाली है और इसके लिए मै इसका खाना हूँ। ये कोई प्रेत या चुड़ैल है, जो इन्सानों का मांस खाती है, और खून पीती है। मानसिक रूप से अधमरा होने के बावजूद मै, वहाँ से पागलों की तरह भागा। वह चुड़ैल मेरे पीछे चिल्लाते हुए दौड़ने लगी। रोते हुए चीखते हुए मै कब्रिस्तान से करीब दो-सों मीटर दूर जा पाया। पर वह भयानक चुड़ैल, वहीं मेरे सामने आ कर खड़ी हो गयी। अब मुझे मेरी मौत सामने नज़र आ रही थी। मैने हार मान ली और भगवान से अपने किए हुए पापों की माफी मांगने लगा। ताकि मौत के बाद मुझे कम तकलीफ हो। उसने इस बार गुस्से में मुझे बालों से पकड़ा और मेरी गर्दन में उसने अपने दाँत गड़ा दिये। मेंने आखरी चीख लगाई तभी अचानक किसी ने मेरे गाल पर जोरदार चांटा मारा और मै ज़मीन पर गिर पड़ा। मैंने सामने देखा तो वहाँ मेरे पापा खड़े थे और बोल रहे थे कामचोर तुझे शर्म नहीं है, दिन भर आवारागर्दी करता घूमता रहता है और रात को इधर रोड पर खड़ा पागलों की तरह चिल्लाता तमाशे करता रहता है और बेशर्म, तू फोन क्यूँ नहीं उठा रहा था रात के डेढ़ बज गए है, तुझे पता है घर पर तेरी माँ चिंता करते हुए कितनी रो रही है? निकम्मे अभी घर चल वरना घसीट कर ले जाऊंगा। मुझे पक्का यकीन था की, वह चुड़ैल शायद मेरे पापा को देखकर, ही भागी होंगी। वरना मेरा तो वो आखरी दिन था। एक बात समज आ गयी है की माँ बाप कितना भी गुस्सा करें, उनकी बात दिल पर लेनी नहीं चाहिए, क्यूँ की वह हमेशा हमारे भले की ही सौचते हैं।

तो दोस्तों ये थी chudail ki kahani में, आप हमें कमेंट बॉक्स में अवश्य बताएं की कैसी लगी आपको ये कहानी। हम आपके लिए ऐसी ही कहानियां ( pisaach ka saaya, Rapunzal ki kahani ) हमेशा लाते रहेंगे।

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